
आज दिल में जागे अरमान,
सोचा संजोलूं कुछ सामान,
भर लूं अपनी झोली,
रहें न खवाईशें अधूरी।
मन ने फरमाइश की अभी,
मुझे चाहिए यह सभी –
एक टुकड़ा आसमान का,
एक बादल का, एक चांद का,
एक तारा, एक रेत का कर्ण,
धूप की इक किरण,
मिट्टी की खुशबू,
फूलों की महक,
ओस की नमी,
बांसुरी की धुन,
इंद्रधनुष के रंग,
अपनो का संग,
आम की मिठास,
प्यारा का एहसास,
क्योंकि,
कल क्या हो, क्या पता!
आज में सब फलसफा












